श्रवण + मनन + आचरण = संतोष

याद रहे, की आचरण करना, अमल करना तबही
संभव है ; जब आपने पुरे मनसे/ ध्यानसे सुना/पढ़ा है !!

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Posted on 07/09/2014, in Dr.Sudhir Shah. Bookmark the permalink. श्रवण + मनन + आचरण = संतोष માટે ટિપ્પણીઓ બંધ છે.

ટિપ્પણીઓ બંધ છે.

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