कल हुई स्वप्न मे, मेरी ‘ मौत ‘ पे

कल हुई स्वप्न मे, मेरी ‘ मौत ‘ पे, मेरी शायराना बाते :- 

 

अपना स्वार्थ निकालने, उपयोग – इस्तेमाल करते थे हमें लोग,

यह जानते थे हम, सभी को देते हुए – हमने सिर्फ दीया ही है … 

गलत को साथ आप ने दीया – हम तो गलत से कोसों दूर रहे जीवन भर .

कभी किसी से लेने की भावना रखी ही नहीं,

जीवन नीकल गया कोई शिकायत नहीं रखी किसीसे,

‘ सब का भला हो ‘ वो ही जीवन मन्त्र था हमारा .

आभारी है सिर्फ और सिर्फ श्रीजीके , हमेशा साथ दीया जीवन मे .

जय हो – जय हो – श्रीजीकी जय हो l 

 

डॉ. सुधीर शाह 

२० – ६ – २०१३ 

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Posted on 20/06/2013, in Dr.Sudhir Shah. Bookmark the permalink. कल हुई स्वप्न मे, मेरी ‘ मौत ‘ पे માટે ટિપ્પણીઓ બંધ છે.

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