एकांत

एकांत को महेसुश करो. खुदको प्रेम करो. 

खुदमे इतना डूब जाओ की आपके पास कोई 

नहीं आता फीरभी आप आनंद मय हो, 

आप कुछभी याद नहीं करते, बस सिर्फ और सिर्फ 

अपने मे मस्त हो, यह स्तिथी आ जाए और आप

स्थिरता महेसुस करो तो समजलो 

की आप मास्टर हो – भिखारी  नहीं l 

 

डॉ. सुधीर शाह 

Posted on 02/06/2013, in Dr.Sudhir Shah. Bookmark the permalink. 1 ટીકા.

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