Monthly Archives: જુલાઇ 2012

Pavitra Ekadashi ( Giyaras) Pusti Marg.

Pavitra Ekadashi ( Giyaras)

Shri Mahaprabhuji Garlanded ShreeNathji with Pavitra ( Cotton thread garland ) and offered him misri ( Crystals of sugar ) .

After this divine meeting ShreeNathji disappered.
Shri Mahaprabhuji composed “Shri Madhurastakam ” Praising the form and beauty of Shri Krishn the way He appered before him.
This Divine happening was on Vikram Samvat 1549 (1492 AD ) Shravan Shukla Giyaras (Ekadashi).
This occasion is celebrated as Pavitra Ekadashi. It is also known as the day of the ” Birth of Pusti Marg ” — The path of Grace and Bhakti..

Dr Sudhir Shah na Vandan

Review by ” Life Positive ” magazine

This is a review

of the website www.zero2dot.org 

as it appears

in the

 Spiritual magazine

‘Life Positive’   in the April 2009 issue.

"Zero2Dot"

This website is based on my book “Zero2dot” ; which is a documentation of my spiritual journey.

 

Review as it appears in the magazine :

 

Rajesh Khanna : उनकी सफर से शिखे

समय किसीकोभी छोडता नहीं है : एक शीख 

राजेश खन्ना ( काका ) की जिंदगीसे कुछ शीखे
सोचो लगातार १५ सुपरडुपर हिट, १०६ सोलो फिल्म,
टॉप स्टार्स के साथ २३ फिल्म्स, और प्रोडूयुसर ” आशीर्वाद ” बंगलेमै
साइनिंग एमौंट लेकर सुबह्से राह देखते हो…..ये चमक दमक का दौर,
और
समय बदला तो न चमचे रहे, न तो कोइ प्रोडूयुसर राह देख रहा है,
कोइ फिल्म अब नहीं है,
कहनेकी बात यह है की काका ने करियर का सूर्योदय और मद्य्यानका सूर्य देखा,
परन्तु सूर्यको ढलते हुए बर्दास्त नहीं कर पाए.  डिप्रेशन के भोग बन गए….और
गम को भुलानेके लिये शराब का सहारा लिया….और याद रखीये की शराब  ने उनको 
नहीं मारा डिप्रेशन ने मारा…
सफलता का ” नशा ” ऐसी चीज है , की उससे ज्यादा खतरनाक उसका ” हेंगओवर ”  होता है
समय के साथ मीलीहूवी सफलता को, समय के साथ डायजेस्ट ( पचाना ) करना शिख लो 
डॉ. सुधीर शाह

Remembering the romantic hero Rajesh Khanna

Rajesh Khanna : End of an Era in Bollywood..

रोमेन्टीक हीरो और सुपरस्टार को श्रधांजली

जीवन में कुछ पालेनेके बाद, खोनेका डर सबको रहता है

राजेश खन्ना ( जतीन खन्ना ) नेभी बहुत कुछ पाया था
और बहुत कुछ खोयाभी था , किन्तु अन्तिम सफ़रमे आनंद जीगया
और फीरएक बार सबकुछ पागया
एक एक्टर था,
और एक्टरको जरुरतके हिसाबसे फिल्म मे इमोशन दीखाने पड़ते है
किन्तु वास्तविक जीवन मे वो इमोशन दीखा नहीं शकते थे !!
लोनलीनेस , अकेलापन , तन्हाई , छुपातेभी छुपती नहीं है !?
कीतनी वास्तविकता भरे गीत उन्हे मीले…
जीन्दगी का सफ़र है ये कैसा सफ़र ….
कन्ही दूर जब दिन ढल जांये….
जींदगी कैसी है पहेली हाये कभी तो हसाए…
कुछ लोकप्रिय डायलोग्स :
पुष्पा, आई हेट टीयर्स …अमरप्रेम
बाबू मोशाय, जींदगी और मौत उपरवाले के हाथ मे है,
उसे ना आप बदल सकते है ना मै,
कब कौन,  कैसे उठेगा,  ये कोई नहीं जानता …आनंद
मै मरने से पहले मरना नहीं चाहता….सफर
ये तो मै भी जानता हूँ की जींदगी के आखरी मोड़ पर कीतना अँधेरा है …. सफर
रोमेन्टीक हीरो और सुपरस्टार को श्रधांजली
डॉ. सुधीर शाह की औरसे भावभरी श्रधांजली

તફાવત બે શબ્દો ને લખવાની રીતનો

” આચરણ ” અને ” આ ચરણ ” માં કેટલો મોટો તફાવત,
બે શબ્દો ને લખવાની રીતનો.
ડૉ. સુધીર શાહ

મન અને રહ્દય Mind and Heart(Soul)

વિચારવું અને આચરણ કરવું એ મન ( Mind ) નું કામ છે.
મન જ વિચારે છે, આચરણ કરવું નહિ કરવું તે મન નક્કી કરે,
પણ 
કયારેક રહ્દયથી ( Soul ) આચરણ કરી જુવો, તફાવત જણાઇ આવશે.

ડૉ. સુધીર શાહ

 

 

વર્તમાનમાં જેછે

મારા વિચારો :

કર્મ કોઈને પણ છોડતું નથી !
કર્મ રૂપી મળેલ જીવન માટે, આપણે પોતેજ જવાબદાર છીએ.
તેથી આજન્મે જેકાઈ પણ છો તેમાં આનંદ લો,
વર્તમાનમાં જેછે તેનો સ્વીકાર કરો.
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